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mahabharat 7.188.39-40h: हे मनुष्यों! वहाँ अदृश्य पुरुषों के मुख से द्रोणाचार्य और अर्जुन की प्रशंसा के शब्द बार-बार सुनाई देने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.188: दु:शासन और सहदेवका, कर्ण और भीमसेनका तथा द्रोणाचार्य और अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 188: दु:शासन और सहदेवका, कर्ण और भीमसेनका तथा द्रोणाचार्य और अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  7.188.39-40h 
तत्र स्मान्तर्हिता वाचो व्यचरन्त पुन: पुन:॥ ३९॥
द्रोणपार्थस्तवोपेता व्यश्रूयन्त नराधिप।
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों! वहाँ अदृश्य पुरुषों के मुख से द्रोणाचार्य और अर्जुन की प्रशंसा के शब्द बार-बार सुनाई देने लगे।
 
O lord of men! There the words praising Dronacharya and Arjuna coming from the mouths of invisible persons started being heard again and again. 39 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)