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mahabharat 7.188.36-37h: महामनस्वी योद्धाओं के बीच अर्जुन के द्वारा इस प्रकार रोके जाने पर स्वयं द्रोणाचार्य ने प्रसन्नतापूर्वक मुस्कुराते हुए अर्जुन को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयत्न किया ॥36 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.188: दु:शासन और सहदेवका, कर्ण और भीमसेनका तथा द्रोणाचार्य और अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 188: दु:शासन और सहदेवका, कर्ण और भीमसेनका तथा द्रोणाचार्य और अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  7.188.36-37h 
वार्यमाणस्तु पार्थेन तथा मध्ये महात्मनाम्॥ ३६॥
यतमानोऽर्जुनं प्रीत्या प्रत्यवारयदुत्स्मयन्।
 
 
अनुवाद
महामनस्वी योद्धाओं के बीच अर्जुन के द्वारा इस प्रकार रोके जाने पर स्वयं द्रोणाचार्य ने प्रसन्नतापूर्वक मुस्कुराते हुए अर्जुन को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयत्न किया ॥36 1/2॥
 
Being stopped in this way by Arjun among the great minded warriors, Dronacharya himself, smiling happily, tried to stop Arjun from moving forward. 36 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)