श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 188: दु:शासन और सहदेवका, कर्ण और भीमसेनका तथा द्रोणाचार्य और अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  7.188.35-36h 
मेने चात्मानमधिकं पृथिव्यामधि भारत॥ ३५॥
तेन शिष्येण सर्वेभ्य: शस्त्रविद्‍भ्य: परंतप:।
 
 
अनुवाद
शत्रुओं को संताप देनेवाले भारत द्रोणाचार्य उस शिष्य के द्वारा संसार के समस्त शस्त्र विशेषज्ञों से अपने को श्रेष्ठ मानने लगे थे ॥35 1/2॥
 
India Dronacharya, who tormented the enemies, started considering himself superior to all the weapons experts in the world through that disciple. 35 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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