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mahabharat 7.188.31-32h: अर्जुन ने द्रोणाचार्य के धनुष से छूटे क्रमशः ऐंद्र, पाशुपत, त्वष्ट्र, वायव्य और वरुण नामक अस्त्रों को तुरंत शांत कर दिया। 31 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.188: दु:शासन और सहदेवका, कर्ण और भीमसेनका तथा द्रोणाचार्य और अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 188: दु:शासन और सहदेवका, कर्ण और भीमसेनका तथा द्रोणाचार्य और अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  7.188.31-32h 
ऐन्द्रं पाशुपतं त्वाष्ट्रं वायव्यमथ वारुणम्॥ ३१॥
मुक्तं मुक्तं द्रोणचापात् तज्जघान धनंजय:।
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने द्रोणाचार्य के धनुष से छूटे क्रमशः ऐंद्र, पाशुपत, त्वष्ट्र, वायव्य और वरुण नामक अस्त्रों को तुरंत शांत कर दिया। 31 1/2॥
 
Arjun immediately pacified the weapons named Aindra, Pashupat, Tvashtra, Vayavya and Varun respectively released from Dronacharya's bow. 31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)