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mahabharat 7.188.30-31h: जब द्रोणाचार्य पाण्डव पुत्र अर्जुन पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध न कर सके, तब अस्त्र-शस्त्र विद्या में निपुण गुरुदेव ने दिव्यास्त्र प्रकट किये।   |   mahabharat अध्याय 7.188: दु:शासन और सहदेवका, कर्ण और भीमसेनका तथा द्रोणाचार्य और अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 188: दु:शासन और सहदेवका, कर्ण और भीमसेनका तथा द्रोणाचार्य और अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  7.188.30-31h 
यदा द्रोणो न शक्नोति पाण्डवं स्म विशेषितुम्॥ ३०॥
तत: प्रादुश्चकारास्त्रमस्त्रमार्गविशारद:।
 
 
अनुवाद
जब द्रोणाचार्य पाण्डव पुत्र अर्जुन पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध न कर सके, तब अस्त्र-शस्त्र विद्या में निपुण गुरुदेव ने दिव्यास्त्र प्रकट किये।
 
When Dronacharya could not prove his superiority over Pandava's son Arjun, then Gurudev, who was an expert in the path of weapons, revealed the divine weapons. 30 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)