श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 188: दु:शासन और सहदेवका, कर्ण और भीमसेनका तथा द्रोणाचार्य और अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  7.188.18-19h 
व्यालीव मन्त्राभिहता कर्णबाणैरभिद्रुता।
तस्या: प्रतिनिपातेन भीमस्य विपुलो ध्वज:॥ १८॥
पपात सारथिश्चास्य मुमोह च गदाहत:।
 
 
अनुवाद
कर्ण के बाणों से आहत होकर वह गदा मंत्र से आहत सर्प के समान भीमसेन के रथ पर गिर पड़ी। उसके गिरने से भीमसेन का विशाल ध्वज चकनाचूर हो गया और उनका सारथि भी गदा के आघात से मूर्छित होकर गिर पड़ा॥18 1/2॥
 
Hurt by Karna's arrows, the mace came crashing down on Bhimasena's chariot like a serpent struck by a mantra. Bhimasena's huge flag was shattered by its fall and his charioteer also fell unconscious after being hit by the mace.॥18 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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