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mahabharat 7.187.8-9: वहाँ दौड़ते हुए पैदल सैनिकों, गिरते हुए हथियारों, हिनहिनाते घोड़ों, लौटते हुए रथों और चिल्लाते और गरजते हुए योद्धाओं की भयानक ध्वनि गूँज रही थी। 8-9   |   mahabharat अध्याय 7.187: युद्धस्थलकी भीषण अवस्थाका वर्णन और नकुलके द्वारा दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 187: युद्धस्थलकी भीषण अवस्थाका वर्णन और नकुलके द्वारा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  7.187.8-9 
द्रवतां च पदातीनां शस्त्राणां पततामपि॥ ८॥
हयानां ह्रेषतां चापि रथानां च निवर्तताम्।
क्रोशतां गर्जतां चैव तदाऽऽसीत् तुमुलं महत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वहाँ दौड़ते हुए पैदल सैनिकों, गिरते हुए हथियारों, हिनहिनाते घोड़ों, लौटते हुए रथों और चिल्लाते और गरजते हुए योद्धाओं की भयानक ध्वनि गूँज रही थी। 8-9
 
There resounded a dreadful sound of running infantry, falling weapons, neighing horses, returning chariots and the shouting and roaring warriors. 8-9
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)