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mahabharat 7.187.55: उस समय आपकी बुरी सलाह और अपने द्वारा झेले गए सभी कष्टों को याद करके नकुल ने आपके पुत्र को ललकारा और कहा, "अरे! स्थिर खड़ा रह, स्थिर खड़ा रह।"   |   mahabharat अध्याय 7.187: युद्धस्थलकी भीषण अवस्थाका वर्णन और नकुलके द्वारा दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 187: युद्धस्थलकी भीषण अवस्थाका वर्णन और नकुलके द्वारा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  7.187.55 
तिष्ठ तिष्ठेति नकुलो बभाषे तनयं तव।
संस्मृत्य सर्वदु:खानि तव दुर्मन्त्रितं च तत्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
उस समय आपकी बुरी सलाह और अपने द्वारा झेले गए सभी कष्टों को याद करके नकुल ने आपके पुत्र को ललकारा और कहा, "अरे! स्थिर खड़ा रह, स्थिर खड़ा रह।"
 
At that time, remembering your evil advice and all the sufferings he had suffered, Nakula challenged your son saying, "Hey! Stand still, stand still."
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणवधपर्वणि नकुलयुद्धे सप्ताशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत द्रोणवधपर्वमें नकुलका युद्धविषयक एक सौ सतासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)