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mahabharat 7.187.5: हे भरतश्रेष्ठ! रथ रथों से और हाथी हाथियों से उलझ गए। इस प्रकार कभी एकत्र होकर और कभी अलग होकर वे योद्धा रणभूमि में गिरने लगे॥5॥   |   mahabharat अध्याय 7.187: युद्धस्थलकी भीषण अवस्थाका वर्णन और नकुलके द्वारा दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 187: युद्धस्थलकी भीषण अवस्थाका वर्णन और नकुलके द्वारा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.187.5 
रथा रथैरिभैर्नागास्तथैव भरतर्षभ।
संसक्ताश्च वियुक्ताश्च योधा: संन्यपतन् रणे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! रथ रथों से और हाथी हाथियों से उलझ गए। इस प्रकार कभी एकत्र होकर और कभी अलग होकर वे योद्धा रणभूमि में गिरने लगे॥5॥
 
O best of the Bharatas! Chariots were entangled with chariots and elephants with elephants. In this manner, sometimes coming together and sometimes getting separated, those warriors began falling on the battlefield.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)