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mahabharat 7.187.38-39h: वे वीर योद्धा एक दूसरे को परास्त करने के लिए आतुर होकर अपनी पूरी शक्ति से तैयार थे और वर्षा ऋतु में बादलों के समान बाणों के रूप में जल की वर्षा कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.187: युद्धस्थलकी भीषण अवस्थाका वर्णन और नकुलके द्वारा दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 187: युद्धस्थलकी भीषण अवस्थाका वर्णन और नकुलके द्वारा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  7.187.38-39h 
यतमाना: पराक्रान्ता: परस्परजिगीषव:॥ ३८॥
जीमूता इव घर्मान्ते शरवर्षैरवाकिरन्।
 
 
अनुवाद
वे वीर योद्धा एक दूसरे को परास्त करने के लिए आतुर होकर अपनी पूरी शक्ति से तैयार थे और वर्षा ऋतु में बादलों के समान बाणों के रूप में जल की वर्षा कर रहे थे।
 
Those valiant warriors, eager to defeat one another, were ready with all their might and were showering water in the form of arrows like clouds during the rainy season.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)