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mahabharat 7.187.29-30h: वहाँ धूल का एक भयंकर और घना बादल इकट्ठा हो गया था, जिसके कारण उस समय सभी को ऐसा लग रहा था, मानो एक और रात आ गई हो।   |   mahabharat अध्याय 7.187: युद्धस्थलकी भीषण अवस्थाका वर्णन और नकुलके द्वारा दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 187: युद्धस्थलकी भीषण अवस्थाका वर्णन और नकुलके द्वारा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  7.187.29-30h 
सम्भ्रान्ते तुमुले घोरे रजोमेघे समुत्थिते॥ २९॥
द्वितीयामिव सम्प्राप्ताममन्यन्त निशां तदा।
 
 
अनुवाद
वहाँ धूल का एक भयंकर और घना बादल इकट्ठा हो गया था, जिसके कारण उस समय सभी को ऐसा लग रहा था, मानो एक और रात आ गई हो।
 
A terrible and thick cloud of dust had gathered there, due to which it seemed to everyone at that time as if another night had arrived. 29 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)