Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.187.26-29h: राजन! जब वहाँ भूमण्डलवंश में उत्पन्न क्षत्रियों का वह महान संहार हुआ, तब युद्ध के लिए तत्पर समस्त लोग सेना द्वारा उड़ाई गई धूल से आच्छादित हो गए। इसीलिए हम वहाँ न तो कर्ण को देख पाए, न द्रोणाचार्य को। न अर्जुन को, न युधिष्ठिर को। भीमसेन, नकुल, सहदेव, धृष्टद्युम्न और सात्यकि को भी हम नहीं देख पाए। दु:शासन, अश्वत्थामा, दुर्योधन, शकुनि, कृपाचार्य, शल्य, कृतवर्मा तथा अन्य महारथी भी हमारी दृष्टि में नहीं आए। दूसरों की तो बात ही क्या? हम अपना शरीर भी नहीं देख पाए, पृथ्वी और दिशाओं को भी नहीं समझ पाए। 26—28 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.187: युद्धस्थलकी भीषण अवस्थाका वर्णन और नकुलके द्वारा दुर्योधनकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पृथिव्यां राजवंश्यानामुत्थिते महति क्षये।
न तत्र कर्णं द्रोणं वा नार्जुनं न युधिष्ठिरम्॥ २६॥
न भीमसेनं न यमौ न पाञ्चाल्यं न सात्यकिम्।
न च दु:शासनं द्रौणिं न दुर्योधनसौबलौ॥ २७॥
न कृपं मद्रराजं च कृतवर्माणमेव च।
न चान्यान् नैव चात्मानं न क्षितिं न दिशस्तथा॥ २८॥
पश्याम राजन् संसक्तान् सैन्येन रजसाऽऽवृतान्।
अनुवाद
राजन! जब वहाँ भूमण्डलवंश में उत्पन्न क्षत्रियों का वह महान संहार हुआ, तब युद्ध के लिए तत्पर समस्त लोग सेना द्वारा उड़ाई गई धूल से आच्छादित हो गए। इसीलिए हम वहाँ न तो कर्ण को देख पाए, न द्रोणाचार्य को। न अर्जुन को, न युधिष्ठिर को। भीमसेन, नकुल, सहदेव, धृष्टद्युम्न और सात्यकि को भी हम नहीं देख पाए। दु:शासन, अश्वत्थामा, दुर्योधन, शकुनि, कृपाचार्य, शल्य, कृतवर्मा तथा अन्य महारथी भी हमारी दृष्टि में नहीं आए। दूसरों की तो बात ही क्या? हम अपना शरीर भी नहीं देख पाए, पृथ्वी और दिशाओं को भी नहीं समझ पाए। 26—28 1/2॥
Rajan! When that great massacre of the Kshatriyas born in the dynasty of Bhumandala took place there, all the people who were ready for war were covered with the dust blown by the army. That is why we could neither see Karna nor Dronacharya there. Neither Arjun nor Yudhishthir were visible. We could not even see Bhimsen, Nakul, Sahadeva, Dhrishtadyumna and Satyaki. Dushasan, Ashwatthama, Duryodhana, Shakuni, Kripacharya, Shalya, Kritavarma and other great warriors also did not come into our sight. What to speak of others? We couldn't even see our own body, couldn't even understand the earth and directions. 26—28 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥