श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 187: युद्धस्थलकी भीषण अवस्थाका वर्णन और नकुलके द्वारा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.187.14 
उद्यतप्रतिपिष्टानां खड्गानां वीरबाहुभि:।
स एव शब्दस्तद्रूपो वाससां निज्यतामिव॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वीर योद्धाओं के हाथों में उठी तलवारों की ध्वनि तथा विरोधियों के शस्त्रों से टकराने की ध्वनि, धोबियों के फीतों पर कपड़े पीटने की ध्वनि के समान प्रतीत होती थी।
 
The sound of the swords raised in the hands of the valiant warriors and clashing with the weapons of the opponents seemed like the sound of clothes being beaten on the thongs of washermen. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)