श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 187: युद्धस्थलकी भीषण अवस्थाका वर्णन और नकुलके द्वारा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.187.1 
संजय उवाच
ते तथैव महाराज दंशिता रणमूर्धनि।
संध्यागतं सहस्रांशुमादित्यमुपतस्थिरे॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- महाराज! वे सब योद्धा पहले के समान कवच धारण करके युद्ध के प्रारम्भ में प्रातः और सायंकाल के समय सहस्त्र किरणों से सुशोभित भगवान सूर्य की आराधना करने लगे॥1॥
 
Sanjay says- Maharaj! All those warriors, wearing the same armor as before, started worshiping Lord Surya, adorned with thousands of rays, at the beginning of the battle in the morning and evening. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)