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mahabharat 7.186.55-56h: ऐसा कहकर भीमसेन क्रोधित हो उठे और धनुष से बाण खींचकर द्रोणाचार्य की सेना में घुसकर उनकी सेना को भगा दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  7.186.55-56h 
इत्युक्त्वा प्राविशत् क्रुद्धो द्रोणानीकं वृकोदर:॥ ५५॥
शरै: पूर्णायतोत्सृष्टैर्द्रावयंस्तव वाहिनीम्।
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर भीमसेन क्रोधित हो उठे और धनुष से बाण खींचकर द्रोणाचार्य की सेना में घुसकर उनकी सेना को भगा दिया।
 
Having said this, Bhimasena infuriated himself and with his arrows drawn completely from his bow entered the army of Dronacharya, chasing away his army. 55 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)