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mahabharat 7.186.53-54h: ये द्रोणाचार्य, जो धनुष-बाण रूपी ईंधन से युक्त हैं और अग्नि के समान तेज से प्रज्वलित हैं, अपने प्रभाव से क्षत्रियों को जला रहे हैं ॥53 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  7.186.53-54h 
एष वैश्वानर इव समिद्ध: स्वेन तेजसा॥ ५३॥
शरचापेन्धनो द्रोण: क्षत्रं दहति तेजसा।
 
 
अनुवाद
ये द्रोणाचार्य, जो धनुष-बाण रूपी ईंधन से युक्त हैं और अग्नि के समान तेज से प्रज्वलित हैं, अपने प्रभाव से क्षत्रियों को जला रहे हैं ॥53 1/2॥
 
This Dronacharya, who is filled with fuel in the form of bow and arrow and burns with brilliance like fire, is burning the Kshatriyas with his influence. 53 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)