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mahabharat 7.186.51-52h: भीमसेन बोले - द्रुपद के कुल में उत्पन्न होकर और समस्त अस्त्र-शस्त्रों का महापंडित होकर भी कौन स्वाभिमानी क्षत्रिय अपने सामने खड़े हुए शत्रु को देख सकेगा? ॥51 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  7.186.51-52h 
भीमसेन उवाच
द्रुपदस्य कुले जात: सर्वास्त्रेष्वस्त्रवित्तम:॥ ५१॥
क: क्षत्रियो मन्यमान: प्रेक्षेतारिमवस्थितम्।
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले - द्रुपद के कुल में उत्पन्न होकर और समस्त अस्त्र-शस्त्रों का महापंडित होकर भी कौन स्वाभिमानी क्षत्रिय अपने सामने खड़े हुए शत्रु को देख सकेगा? ॥51 1/2॥
 
Bhimasena said - Even after being born in the family of Drupada and being the greatest scholar of all the weapons, which self-respecting Kshatriya will be able to see the enemy standing in front of him? ॥ 51 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)