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mahabharat 7.186.46: आज जो कोई द्रोणाचार्य को जीवित पकड़ सकेगा या उन्हें परास्त कर सकेगा, वह यज्ञ करने, कुएँ बनवाने और बाग लगाने आदि के पुण्य से वंचित हो जाएगा। वह क्षत्रियत्व और ब्राह्मणत्व से भी पतित हो जाएगा।॥46॥   |   mahabharat अध्याय 7.186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  7.186.46 
इष्टापूर्तात् तथा क्षात्राद् ब्राह्मण्याच्च स नश्यतु।
द्रोणो यस्याद्य मुच्येत यं वा द्रोण: पराभवेत्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
आज जो कोई द्रोणाचार्य को जीवित पकड़ सकेगा या उन्हें परास्त कर सकेगा, वह यज्ञ करने, कुएँ बनवाने और बाग लगाने आदि के पुण्य से वंचित हो जाएगा। वह क्षत्रियत्व और ब्राह्मणत्व से भी पतित हो जाएगा।॥46॥
 
Today, whoever is able to capture Dronacharya alive or defeat him will be deprived of the merits of performing sacrifices, constructing wells and planting gardens, etc. He will also fall from Kshatriyahood and Brahminhood.'॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)