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mahabharat 7.186.43-45: विराट, द्रुपद, केकय, चेदि, मत्स्य, पांचाल तथा राजा द्रुपद के तीन वीर पौत्रों का वध देखकर महाहृदयी धृष्टद्युम्न ने क्रोध और शोक में भरकर रथियों के बीच में यह शपथ ली।   |   mahabharat अध्याय 7.186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध  »  श्लोक 43-45
 
 
श्लोक  7.186.43-45 
हते विराटे द्रुपदे केकयेषु तथैव च॥ ४३॥
तथैव चेदिमत्स्येषु पञ्चालेषु तथैव च।
हतेषु त्रिषु वीरेषु द्रुपदस्य च नप्तृषु॥ ४४॥
द्रोणस्य कर्म तद् दृष्ट्वा कोपदु:खसमन्वित:।
शशाप रथिनां मध्ये धृष्टद्युम्नो महामना:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
विराट, द्रुपद, केकय, चेदि, मत्स्य, पांचाल तथा राजा द्रुपद के तीन वीर पौत्रों का वध देखकर महाहृदयी धृष्टद्युम्न ने क्रोध और शोक में भरकर रथियों के बीच में यह शपथ ली।
 
After seeing the slaying of the warriors Virata, Drupada, Kekaya, Chedi, Matsya, Panchala and the three heroic grandsons of King Drupada, the great-hearted Dhrishtadyumna, filled with anger and grief, took this oath in the midst of the charioteers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)