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mahabharat 7.186.40-41h: तब राजा द्रुपद ने क्रोध में भरकर, सर्पराज के समान सोने से मढ़ा हुआ, लोहे से मढ़ा हुआ एक भयंकर भाला द्रोणाचार्य पर चलाया।   |   mahabharat अध्याय 7.186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  7.186.40-41h 
शक्तिं च द्रुपदो घोरामायसीं स्वर्णभूषिताम्॥ ४०॥
चिक्षेप भुजगेन्द्राभां क्रुद्धो द्रोणरथं प्रति।
 
 
अनुवाद
तब राजा द्रुपद ने क्रोध में भरकर, सर्पराज के समान सोने से मढ़ा हुआ, लोहे से मढ़ा हुआ एक भयंकर भाला द्रोणाचार्य पर चलाया।
 
Then King Drupada, filled with anger, used a fearsome iron-adorned spear decorated with gold, which looked like a King of Snakes, at Dronacharya. 40 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)