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mahabharat 7.186.30-31h: राजेन्द्र! पांचाल सैनिक द्रोणाचार्य के बाणों से विशेष रूप से पीड़ित थे और अत्यन्त पीड़ा सहते हुए भी वे युद्धभूमि में डटे रहे।   |   mahabharat अध्याय 7.186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  7.186.30-31h 
पञ्चालास्तु विशेषेण द्रोणसायकपीडिता:॥ ३०॥
समसज्जन्त राजेन्द्र समरे भृशवेदना:।
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! पांचाल सैनिक द्रोणाचार्य के बाणों से विशेष रूप से पीड़ित थे और अत्यन्त पीड़ा सहते हुए भी वे युद्धभूमि में डटे रहे।
 
Rajendra! The Panchala soldiers were particularly afflicted by Dronacharya's arrows and despite suffering a lot of pain, they stood firm on the battlefield. 30 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)