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mahabharat 7.186.3: पूर्व दिशा में अरुण से प्रकाशित सूर्यदेव का मंडल स्वर्ण चक्र के समान शोभायमान होने लगा॥3॥   |   mahabharat अध्याय 7.186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.186.3 
प्राच्यां दिशि सहस्रांशोररुणेनारुणीकृतम्।
तपनीयं यथा चक्रं भ्राजते रविमण्डलम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पूर्व दिशा में अरुण से प्रकाशित सूर्यदेव का मंडल स्वर्ण चक्र के समान शोभायमान होने लगा॥3॥
 
In the east, the Sun God's circle, illuminated by Arun, started becoming beautiful like a golden disc. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)