श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  7.186.27-28h 
केचिदासन् निरुत्साहा: केचित् क्रुद्धा मनस्विन:॥ २७॥
विस्मिताश्चाभवन् केचित् केचिदासन्नमर्षिता:।
 
 
अनुवाद
कुछ योद्धाओं का युद्ध करने का उत्साह समाप्त हो गया, कुछ वीर योद्धा क्रोध से भर गए, कुछ उनके पराक्रम को देखकर आश्चर्यचकित हो गए और कुछ ईर्ष्या से भर गए॥27 1/2॥
 
Some warriors lost their enthusiasm to fight, some brave warriors were filled with rage, some were astonished to see their valour and some were overcome by jealousy.॥ 27 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)