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mahabharat 7.186.25-26h: भारत! वहाँ प्रकट हुए तेजस्वी द्रोणाचार्य को देखकर शत्रु सैनिक काँप उठे। बहुत से सैनिक वहाँ से भाग गए और बहुत से दुःखी मन से वहीं खड़े रहे॥25 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.186.25-26h 
भ्राजमानं श्रिया युक्तं ज्वलन्तमिव तेजसा॥ २५॥
द्रोणं दृष्ट्वा परे त्रेसुश्चेरुर्मम्लुश्च भारत।
 
 
अनुवाद
भारत! वहाँ प्रकट हुए तेजस्वी द्रोणाचार्य को देखकर शत्रु सैनिक काँप उठे। बहुत से सैनिक वहाँ से भाग गए और बहुत से दुःखी मन से वहीं खड़े रहे॥25 1/2॥
 
Bharat! The enemy soldiers trembled on seeing the glorious Dronacharya appearing there. Many fled from there and many stood there with sad hearts.॥ 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)