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mahabharat 7.186.23-24h: उधर द्रोणाचार्य उस रणभूमि से उत्तर दिशा की ओर चले गए और निर्धूम अग्नि के समान प्रज्वलित होकर रणभूमि में खड़े हो गए॥23 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  7.186.23-24h 
ततस्त्वभ्यवसृत्यैव संग्रामादुत्तरां दिशम्॥ २३॥
अतिष्ठदाहवे द्रोणो विधूमोऽग्निरिव ज्वलन्।
 
 
अनुवाद
उधर द्रोणाचार्य उस रणभूमि से उत्तर दिशा की ओर चले गए और निर्धूम अग्नि के समान प्रज्वलित होकर रणभूमि में खड़े हो गए॥23 1/2॥
 
On the other hand, Dronacharya went towards north from that battlefield and stood on the battlefield blazing like a smokeless fire.॥ 23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)