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mahabharat 7.186.17-18h: उस समय वहाँ धूल की एक बौछार हुई। साथ ही बाणों की भी वर्षा हुई। इससे वहाँ घोर अंधकार छा गया और ज़ोरदार शोर होने लगा। 17 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  7.186.17-18h 
उद्‍धूता रजसो वृष्टि: शरवृष्टिस्तथैव च॥ १७॥
तमश्च घोरं शब्दश्च तदा समभवन्महान्।
 
 
अनुवाद
उस समय वहाँ धूल की एक बौछार हुई। साथ ही बाणों की भी वर्षा हुई। इससे वहाँ घोर अंधकार छा गया और ज़ोरदार शोर होने लगा। 17 1/2
 
At that time, a shower of dust fell over the place. Along with that, a shower of arrows was also falling. Due to this, there was complete darkness and a loud noise started. 17 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)