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mahabharat 7.186.16-17h: अर्जुन ने अपनी गति में तीव्र और इन्द्रियों को वश में करके अपने शत्रुओं के अस्त्रों को अपने ही अस्त्रों से नष्ट कर दिया और दस-दस तीखे बाणों से उन सबको बींध डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  7.186.16-17h 
अस्त्रैरस्त्राणि संवार्य लघुहस्तो जितेन्द्रिय:॥ १६॥
सर्वानविध्यन्निशितैर्दशभिर्दशभि: शरै:।
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने अपनी गति में तीव्र और इन्द्रियों को वश में करके अपने शत्रुओं के अस्त्रों को अपने ही अस्त्रों से नष्ट कर दिया और दस-दस तीखे बाणों से उन सबको बींध डाला।
 
Arjuna, who was swift in his movements and had controlled his senses, warded off the weapons of his enemies with his own weapons and pierced them all with ten sharp arrows each. 16 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)