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mahabharat 7.186.1: संजय कहते हैं - हे प्रजानाथ! जब रात्रि के पंद्रह मुहूर्तों में से केवल तीन मुहूर्त शेष रह गए थे, तब हर्ष और उत्साह से भरा हुआ कौरवों और पाण्डवों का युद्ध आरम्भ हो गया॥1॥   |   mahabharat अध्याय 7.186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.186.1 
संजय उवाच
त्रिभागमात्रशेषायां रात्र्यां युद्धमवर्तत।
कुरूणां पाण्डवानां च संहृष्टानां विशाम्पते॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे प्रजानाथ! जब रात्रि के पंद्रह मुहूर्तों में से केवल तीन मुहूर्त शेष रह गए थे, तब हर्ष और उत्साह से भरा हुआ कौरवों और पाण्डवों का युद्ध आरम्भ हो गया॥1॥
 
Sanjaya says - O Prajanath! When only three out of the fifteen muhurtas of the night were remaining, the war between the Kauravas and the Pandavas, filled with joy and enthusiasm, began.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)