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mahabharat 7.185.9: संजय कहते हैं - हे राजन! जब आपके पुत्र ने द्रोणाचार्य को इस प्रकार प्रोत्साहित किया और उनका क्रोध बढ़ाया, तब वे क्रोधित होकर दुर्योधन से इस प्रकार बोले -॥9॥   |   mahabharat अध्याय 7.185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.185.9 
संजय उवाच
एवमुद्धर्षितो द्रोण: कोपितश्च सुतेन ते।
समन्युरब्रवीद् राजन् दुर्योधनमिदं वच:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! जब आपके पुत्र ने द्रोणाचार्य को इस प्रकार प्रोत्साहित किया और उनका क्रोध बढ़ाया, तब वे क्रोधित होकर दुर्योधन से इस प्रकार बोले -॥9॥
 
Sanjaya says: O King, when your son encouraged Dronacharya in this manner and increased his anger, then he became infuriated and spoke to Duryodhan thus:॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)