श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.185.5 
दिव्यान्यस्त्राणि सर्वाणि ब्राह्मादीनि च यानि ह।
तानि सर्वाणि तिष्ठन्ति भवत्येव विशेषत:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मास्त्र आदि समस्त दिव्यास्त्र आपमें विशेष रूप से प्रतिष्ठित हैं ॥5॥
 
All the divine weapons like Brahmastra etc. are specially established in you. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)