श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.185.4 
सर्वथा परिहीना: स्म तेजसा च बलेन च।
भवता पाल्यमानास्ते विवर्धन्ते पुन: पुन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हम लोग बल और पराक्रम से सर्वथा रहित हो गए हैं, परंतु वे पाण्डव आपके द्वारा सुरक्षित होकर बार-बार आगे बढ़ रहे हैं॥4॥
 
We have become totally devoid of power and strength, but those Pandavas, being protected by you, are repeatedly advancing. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)