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यह कहकर द्रोणाचार्य युद्धभूमि के उस ओर लौट गए जहाँ शत्रु सेना थी। तत्पश्चात सेना दो भागों में विभाजित हो गई और तत्काल युद्ध आरम्भ हो गया।
Saying this, Dronacharya returned to the side of the battlefield where the enemy army was. Thereafter the army was divided into two parts and the battle began immediately.
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणवधपर्वणि द्रोणदुर्योधनभाषणे पञ्चाशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत द्रोणवधपर्वमें द्रोणाचार्य और दुर्योधनका सम्भाषणविषयक एक सौ पचासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८५॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ३७ १/२ श्लोक हैं।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥