श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  7.185.36-37h 
दत्तं भुक्तमधीतं च प्राप्तमैश्वर्यमीप्सितम्॥ ३६॥
कृतकृत्योऽनृणश्चासि मा भैर्युध्यस्व पाण्डवम्।
 
 
अनुवाद
‘तुमने बहुत दान दिया है, सुख भोगा है, स्वयं विद्याध्ययन किया है और इच्छित धन भी अर्जित किया है। अब तुम सिद्ध हो चुके हो और देवताओं, ऋषियों तथा पितरों के ऋण से मुक्त हो चुके हो; अतः भयभीत मत हो। पाण्डुपुत्र अर्जुन के साथ युद्ध करो।’॥36 1/2॥
 
‘You have given a lot of charity, enjoyed pleasures, studied on your own and also acquired the wealth you wanted. Now you are accomplished and free from the debt of the gods, sages and ancestors; so do not be afraid. Fight with Arjuna, son of Pandu.’॥ 36 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)