श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  7.185.31-32h 
एषोऽक्षकुशलो जिह्मो द्यूतकृत् कितव: शठ:॥ ३१॥
देविता निकृतिप्रज्ञो युधि जेष्यति पाण्डवान्।
 
 
अनुवाद
वह पासे फेंकने में बहुत कुशल है। वह चालाकी, छल और कपट से भरपूर है। वह जुआरी तो है ही, छल-कपट का भी अच्छा जानकार है। वह युद्ध में पांडवों को अवश्य हरा देगा।
 
‘He is very skilled in throwing dice. He is full of cunningness, deceit and cunningness. He is not only a gambler but also has a good knowledge of deceit. He will definitely defeat the Pandavas in the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)