Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.185.30-31h: इस शत्रुता का मूल तुम ही हो, अतः हे गांधारीनंदन, तुम स्वयं जाकर अर्जुन का सामना करो! इन छल-कपटों के खिलाड़ी तुम्हारे मामा शकुनि भी बड़े बुद्धिमान और क्षत्रिय धर्म का पालन करने को तत्पर हैं। युद्ध में अर्जुन पर आक्रमण तो इन्हें ही करना चाहिए। 30 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस शत्रुता का मूल तुम ही हो, अतः हे गांधारीनंदन, तुम स्वयं जाकर अर्जुन का सामना करो! इन छल-कपटों के खिलाड़ी तुम्हारे मामा शकुनि भी बड़े बुद्धिमान और क्षत्रिय धर्म का पालन करने को तत्पर हैं। युद्ध में अर्जुन पर आक्रमण तो इन्हें ही करना चाहिए। 30 1/2॥
‘You are the root of this enmity, so go and face Arjun yourself, Gandhari Nandan! Your uncle Shakuni, the player of these deceitful tricks, is also very intelligent and ready to follow the Kshatriya religion. Only these should attack Arjuna in the war. 30 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥