श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.185.3 
यत् तु मर्षितमस्माभिर्भवत: प्रियकाम्यया।
त एते परिविश्रान्ता: पाण्डवा बलवत्तरा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
इस समय हमने क्षमा का परिचय दिया है और सोते हुए शत्रुओं पर आक्रमण नहीं किया है, यह केवल आपकी प्रसन्नता की इच्छा से ही किया गया है। इसका फल यह है कि इन पाण्डव सैनिकों को पूर्ण विश्राम मिल गया है और वे पुनः अत्यन्त बलवान हो गए हैं॥3॥
 
At this time we have shown forgiveness and have not attacked the enemies while they were sleeping, this has been done only out of the desire to please you. The result of this is that these Pandava soldiers have got complete rest and have again become very strong.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)