श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.185.25-26h 
तं न वित्तपतिर्नेन्द्रो न यमो न जलेश्वर:॥ २५॥
नासुरोरगरक्षांसि क्षपयेयु: सहायुधम्।
 
 
अनुवाद
‘धनुषधारी अर्जुन को न तो कोषाध्यक्ष कुबेर, न इन्द्र, न यमराज, न जल के स्वामी वरुण, न दैत्य, न सर्प और राक्षस ही नष्ट कर सकते हैं।॥25 1/2॥
 
‘Neither Kubera, the treasurer, nor Indra, nor Yamaraja, nor Varuna, the lord of water, nor the demons, serpents and monsters can destroy Arjun who has a bow in his hands.॥ 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)