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mahabharat 7.185.24-25h: नरेश्वर! कौन क्षत्रिय अपने तेज से जलने वाले क्षत्रियमुख वाले गाण्डीव को अविनाशी अर्जुन को मार सकता है? 24 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  7.185.24-25h 
को हि गाण्डीवधन्वानं ज्वलन्तमिव तेजसा॥ २४॥
अक्षयं क्षपयेत् कश्चित् क्षत्रिय: क्षत्रियर्षभम्।
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! कौन क्षत्रिय अपने तेज से जलने वाले क्षत्रियमुख वाले गाण्डीव को अविनाशी अर्जुन को मार सकता है? 24 1/2॥
 
Nareshwar! Which Kshatriya can kill the indestructible Arjuna, the Kshatriya-headed Gandiva, who burns with his brilliance? 24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)