श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  7.185.23-24h 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा भारद्वाजो हसन्निव॥ २३॥
अन्ववर्तत राजानं स्वस्ति तेऽस्त्विति चाब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
दुर्योधन के ये वचन सुनकर द्रोणाचार्य ने मुस्कराकर उसके वचनों का अनुमोदन किया और ‘आपका कल्याण हो’ कहकर पुनः राजा दुर्योधन से इस प्रकार बोले -॥23 1/2॥
 
On hearing these words of Duryodhana, Dronacharya smilingly approved of his words and saying, 'May you be blessed', he again spoke to King Duryodhana in the following manner -॥ 23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)