श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  7.185.21-22h 
संजय उवाच
तं तदाभिप्रशंसन्तमर्जुनं कुपितस्तदा॥ २१॥
द्रोणं तव सुतो राजन् पुनरेवेदमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! जब द्रोणाचार्य इस प्रकार अर्जुन की प्रशंसा कर रहे थे, तब आपके पुत्र ने क्रोधित होकर उनसे पुनः यह कहा -॥21 1/2॥
 
Sanjaya says - O King! While Dronacharya was praising Arjun in this manner, your son became angry and said the following again to him -॥ 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)