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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  7.185.20-21h 
प्रत्यक्षं चैव ते सर्वं यथाबलमिदं तव॥ २०॥
क्षपितं पाण्डुपुत्रेण चेष्टतां नो विशाम्पते।
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! हमारे सर्वोत्तम प्रयत्नों के बावजूद पाण्डुपुत्र अर्जुन ने जिस प्रकार आपकी सेना का संहार किया है, वह आपकी आँखों के सामने है।'
 
Prajanaath! Despite our best efforts, the way Panduputra Arjuna has destroyed your army is right in front of your eyes.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)