श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  7.185.17-18h 
गन्धर्वा घोषयात्रायां चित्रसेनादयो जिता:॥ १७॥
यूयं तैर्ह्रियमाणाश्च मोक्षिता दृढधन्वना।
 
 
अनुवाद
‘घोषयात्रा के समय जब चित्रसेन आदि गन्धर्व आपका अपहरण कर रहे थे, तब प्रबल धनुषधारी अर्जुन ने ही उन सबको परास्त करके आपको बंदीगृह से मुक्त कराया था।॥17 1/2॥
 
‘At the time of the Ghoshyatra when the Gandharvas like Chitrasena were abducting you, it was Arjuna, who wielded a strong bow, who defeated them all and released you from captivity.॥ 17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)