श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  7.185.14-15h 
तं न देवा न गन्धर्वा न यक्षा न च राक्षसा:॥ १४॥
उत्सहन्ते रणे जेतुं कुपितं सव्यसाचिनम्।
 
 
अनुवाद
युद्ध में क्रोधित हुए सव्यसाची अर्जुन को न तो देवता, न गंधर्व, न यक्ष, न राक्षस ही पराजित कर सकते हैं।
 
Neither gods, nor Gandharvas, nor Yakshas, ​​nor demons can defeat Savyasachi Arjun who was enraged in the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)