श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  7.185.13-14h 
मन्यसे यच्च कौन्तेयमर्जुनं श्रान्तमाहवे॥ १३॥
तस्य वीर्यं महाबाहो शृणु सत्येन कौरव।
 
 
अनुवाद
परन्तु तुम यह भ्रम कर रहे हो कि कुन्तीकुमार अर्जुन युद्ध में थक गए हैं। महाबाहु कुरुराज! मैं तुम्हें उनके पराक्रम का यथार्थ वर्णन सुनाता हूँ, सुनो।॥13 1/2॥
 
‘But you are mistaken that Kuntikumar Arjuna is tired in the war. Mighty-armed Kuru King! I will tell you the truth about his prowess, listen.॥ 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)