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mahabharat 7.185.12-13h: हे राजन! मैं सत्य की शपथ लेकर धनुष को स्पर्श करता हूँ और कहता हूँ कि जब तक मैं युद्ध में अपना पराक्रम प्रकट करके समस्त पांचालों का वध न कर लूँगा, तब तक मैं अपना कवच नहीं उतारूँगा।॥12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  7.185.12-13h 
निहत्य सर्वपञ्चालान् युद्धे कृत्वा पराक्रमम्॥ १२॥
विमोक्ष्ये कवचं राजन् सत्येनायुधमालभे।
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैं सत्य की शपथ लेकर धनुष को स्पर्श करता हूँ और कहता हूँ कि जब तक मैं युद्ध में अपना पराक्रम प्रकट करके समस्त पांचालों का वध न कर लूँगा, तब तक मैं अपना कवच नहीं उतारूँगा।॥12 1/2॥
 
O King! I swear by the truth and while touching my bow I say that I will not remove my armour until I have displayed my prowess in the war and killed all the Panchalas.'॥ 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)