Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.185.11-12h: ये सभी लोग दिव्यास्त्रों को नहीं जानते और मैं जानता हूँ, इसलिए मुझे उन्हीं अस्त्रों से इन सबको मारना होगा। कुरुपुत्र! आप जो भी उचित समझें, अच्छा या बुरा, मैं आपकी आज्ञा के अनुसार वही करूँगा; उसके विपरीत कुछ भी नहीं करूँगा।॥ 11 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनस्त्रविदयं सर्वो हन्तव्योऽस्त्रविदा जन:।
यद् भवान् मन्यते चापि शुभं वा यदि वाशुभम्॥ ११॥
तद् वै कर्तास्मि कौरव्य वचनात् तव नान्यथा।
अनुवाद
ये सभी लोग दिव्यास्त्रों को नहीं जानते और मैं जानता हूँ, इसलिए मुझे उन्हीं अस्त्रों से इन सबको मारना होगा। कुरुपुत्र! आप जो भी उचित समझें, अच्छा या बुरा, मैं आपकी आज्ञा के अनुसार वही करूँगा; उसके विपरीत कुछ भी नहीं करूँगा।॥ 11 1/2॥
‘All these people do not know the divine weapons and I do, therefore I will have to kill them all with the same weapons. Son of Kuru! Whatever you think is right to do, good or bad, I will do that as per your instructions; I will not do anything contrary to that.॥ 11 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥