श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 185: दुर्योधनका उपालम्भ और द्रोणाचार्यका व्यंगपूर्ण उत्तर  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.185.1 
संजय उवाच
ततो दुर्योधनो द्रोणमभिगम्याब्रवीदिदम्।
अमर्षवशमापन्नो जनयन् हर्षतेजसी॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! तत्पश्चात् दुर्योधन क्रोध में भरकर द्रोणाचार्य के पास गया और उनसे प्रसन्नतापूर्वक प्रसन्नतापूर्वक यह बात कही॥1॥
 
Sanjaya says - O King! Thereafter Duryodhan, filled with resentment, went to Dronacharya and said the following to him, inspiring him to be delighted and excited.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)