श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना  »  श्लोक 6-8h
 
 
श्लोक  7.184.6-8h 
नकुल: सहदेवश्च द्रौपदेया: प्रभद्रका:॥ ६॥
द्रुपदश्च विराटश्च पुत्रभ्रातृसमन्वितौ।
सात्यकि: केकयाश्चैव पाण्डवश्च धनंजय:॥ ७॥
अभिद्रवन्तु वेगेन कुम्भयोनिवधेप्सया।
 
 
अनुवाद
नकुल, सहदेव, द्रौपदी के पांचों पुत्र, प्रभद्रक, द्रुपद, उनके पुत्र और भाई, तथा विराट, सात्यकि, केकय और पाण्डुपुत्र अर्जुन - ये सब द्रोणाचार्य को मार डालने की इच्छा से उन पर शीघ्रतापूर्वक आक्रमण करें।
 
Nakul, Sahadeva, the five sons of Draupadi, the Prabhadrakas, Drupada with his sons and brothers, and Virata, Satyaki, Kekay and Arjuna, the son of Pandu - let them quickly attack Dronacharya with the desire to kill him. 6-7 1/2"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)