vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना
»
श्लोक 52
श्लोक
7.184.52
ततो मुहूर्ताद् भुवनं ज्योतिर्भूतमिवाभवत्।
अप्रख्यमप्रकाशं च जगामाशु तमस्तथा॥ ५२॥
अनुवाद
तत्पश्चात्, क्षण भर में ही सम्पूर्ण जगत प्रकाशित हो गया। अंधकार अदृश्य हो गया। ॥52॥
Thereafter, in a single moment, the entire world became illuminated. Darkness vanished from sight. It disappeared invisibly. ॥ 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×