श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  7.184.52 
ततो मुहूर्ताद् भुवनं ज्योतिर्भूतमिवाभवत्।
अप्रख्यमप्रकाशं च जगामाशु तमस्तथा॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, क्षण भर में ही सम्पूर्ण जगत प्रकाशित हो गया। अंधकार अदृश्य हो गया। ॥52॥
 
Thereafter, in a single moment, the entire world became illuminated. Darkness vanished from sight. It disappeared invisibly. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)