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mahabharat 7.184.5-6h: अतः तुम हर्ष में भरकर युद्धभूमि में द्रोणाचार्य पर आक्रमण करो। तुम्हें किसी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए। जनमेजय, शिखंडी और दुर्मुखपुत्र यशोधर हर्ष और उत्साह में भरकर द्रोणाचार्य पर चारों ओर से आक्रमण करें।   |   mahabharat अध्याय 7.184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  7.184.5-6h 
अभिद्रव रणे हृष्टो मा च ते भी: कथंचन।
जनमेजय: शिखण्डी च दौर्मुखिश्च यशोधर:॥ ५॥
अभिद्रवन्तु संहृष्टा: कुम्भयोनिं समन्तत:।
 
 
अनुवाद
अतः तुम हर्ष में भरकर युद्धभूमि में द्रोणाचार्य पर आक्रमण करो। तुम्हें किसी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए। जनमेजय, शिखंडी और दुर्मुखपुत्र यशोधर हर्ष और उत्साह में भरकर द्रोणाचार्य पर चारों ओर से आक्रमण करें।
 
‘Therefore, be filled with joy and attack Dronacharya in the battlefield. You should not have any fear. Janamejaya, Shikhandi and Durmukh's son Yashodhar - filled with joy and enthusiasm, should attack Dronacharya from all sides. 5 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)